जनहित याचिका
आस पास हो रहे घटनाक्रम और कुछ बातें ऐसी होती हैं, जिनपर हमें ध्यान देना चाहिए... कई बार कुछ आसान शब्दों को हम सुनते रहते हैं, जिनका संबंध सीधा हमसे ही होता है... जैसे पब्लिक मीटिंग, पब्लिक ट्रांसपोर्ट, पब्लिक पार्क, या पब्लिक इंट्रेस्ट लिटिगेशन... जिनका संबध आम आदमी से यानी हमसे होता है... लेकिन हम इन घिसे पिटे शब्दों को ज्यादा गंभीरता से नहीं लेते... जबकि ये शब्द या संस्थाएं हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण होती है... इनसे हमारे हित जुड़े हुए होते हैं... आमजन की बड़ी बड़ी समस्याएं हम सुलझा सकते हैं, अगर ठीक से आंख, कान खुले रखें तो... हमारी समस्याओं को सुलझाने के लिए ही पीआईएल या जनहित याचिका कोर्ट में लगाई जाती है... ये याचिका आमजन की तरफ से, सरकार के या सरकार की किसी घटक या सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्था के खिलाफ लगाई जाती है... किसी समस्या का सामना जब आम आदमी बार बार करता है और सरकार ज्ञापन देने के बावजूद भी उस समस्या के निवारण पर कोई कार्यवाही नहीं करती है, तब अपनी समस्या को लेकर न्यायालय की शरण में जाने का ही रास्ता बचता है... आज हम जनहित याचिका के विषय में बात करेंगे....
जनहित याचिका
अपने आस पास होने वाली घटनाओं से आप परेशान हैं, लगता है कि सरकार या सरकारी संस्थाओं, सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त संस्थाओं द्वारा या उसके क्रियाकलापों द्वारा मानव ले बुनियादी अधिकारों का हनन हो रहा है, या न्याय नहीं मिल रहा है... जिसका असर समाज में व्यापक स्तर पर पड़ रहा है, और भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है, ऐसी स्थिति से निवारण के लिए कोर्ट की शरण लेनी पड़ती है और कोर्ट को इसके बारे में और इसके परिणामों के बारे में विस्तार से एक पत्र का अर्जी के माध्यम से अवगत कराया जाता है, यही पत्र या अर्जी जनहित याचिका कहलाती है... जनहित याचिका का संबंध व्यक्तिगत न होकर सार्वजनिक होता है...!
समाज में जागरूक व्यक्ति किसी भी पब्लिक समस्या से परेशान हैं और इस समस्या से निजात दिलाना चाहता है तो उन्हें जनहित याचिका के विषय में जानना चाहिए... ताकि समाज में हो रहे अन्याय को रोका जा सके...!
जनहित याचिका होती क्या है ?
जनहित याचिका संविधान, सार्वजनिक हितों, या अधिकारों की मुकदमे का अधिकार देती है, या इसमें सामाजिक हितों की सुरक्षा के लिए मुकदमे का प्रावधान है, जनहित याचिका में आवश्यक नहीं है कि प्रभावित पक्ष न्यायालय में उपस्थित होकर कोर्ट से न्याय की मांग करे, इसमें कोई भी आम नागरिक या न्यायालय स्वत: संज्ञान ले सकता है.
जनहित याचिकाओं ने कारागार में बंदी, सेना, पर्यावरण, बंधुआ मजदूरों, प्राकृतिक संसाधनों के दुरुपयोग, उपभोक्ता मामले, राजनीति और शिक्षा जैसे बहुत से मामलों में निर्णय दिए हैं... जिनसे समाज में बदलाव आया है.
जनहित याचिका की संविधान में कोई भी व्याख्या या उल्लेख नहीं है, यह सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संविधान की व्याख्या से निकला शब्द है, जनहित याचिका का कोई भी समान अंतरराष्ट्रीय कानून नहीं है... ये विशुद्ध रूप से भारतीय अवधारणा है.
जनहित याचिका न्यायपालिका का अधिकार है, भारत में जनहित याचिका को प्रचलन में लाने का श्रेय PN भगवती को है, PN भगवती को जनहित याचिकाओं का जनक कहा जाता है. जस्टिस पीएन भगवती का कथन है कि Post Card पर भी किसी समस्या को लिखकर न्यायालय को भेज दीजिए, उसे भी जनहित याचिका माना जाएगा...!
जनहित याचिका कौन दायर कर सकता है ?
- लोकहित से प्रेरित होकर कोई व्यक्ति, संघठन जनहित याचिका दायर कर सकता है.
- कोर्ट को दिया गया Post Card भी जनहित याचिका मानकर स्वीकार किया जा सकता है.
लाभ
- जनहित याचिका से आमजन में अपने अधिकारों के प्रति चेतना जागृत होती है.
- मौलिक अधिकारों का विस्तार होता है.
- व्यक्ति को नए अधिकार मिलते हैं.
- जनहित याचिका कार्यपालिका और विधायिका को संवैधानिक कर्तव्य के लिए बाध्य करती है.
- जनहित याचिका या PIL व्यवस्था को भ्रष्टाचार से मुक्ति के लिए सुनिश्चित करती है.
कोई भी भारतीय नागरिक जनहित याचिका दायर कर सकता है, लेकिन जनहित याचिका का उद्देश्य व्यक्तिगत न होकर सार्वजनिक हित होना चाहिए.
किस न्यायालय में दायर की जाती है ?
जनहित याचिका अनुच्छेद 32 कर 226 के तहत केवल सर्वोच्च न्यायालय या उच्च न्यायालय में ही दायर की जा सकती है.
प्रक्रिया
- याचिका दायर करने से पहले संबंधित मामले की पूर्ण जानकारी होनी चाहिए.
- याचिका अगर कुछ लोगों या किसी समूह से संबद्ध रखती है तो उनसे इस विषय पर सलाह मशविरा कर लेना चाहिए.
- जनहित याचिका दायर करने से पहले संबंधित मामले से जुड़े समस्त दस्तावेज इक्कठे कर लेने चाहिए.
- जनहित याचिका दायर करने वाला वकील के बिना खुद भी बहस कर सकता है.
- जिस मामले में जनहित याचिका दायर की जा रही है, उससे जुड़े कानून और नियम पता कर लेने चाहिए.
- याचिका जब उच्च न्यायालय में दायर की जाती है तो उसकी दो कॉपी तैयार कर लेनी चाहिए.
यदि जनहित याचिका सर्वोच्च न्यायालय में दायर की जा रही है तो...
- तो उसकी पांच कॉपीज तैयार कर लेनी चाहिए.
- उच्च न्यायालय में तो याचिका दायर करने से पहले प्रतिपक्ष को एक-एक कॉपी भेजनी होती है, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय में न्यायालय द्वारा नोटिस जारी करने के बाद प्रतिपक्ष को कॉपी भेजी जाती है.
याचिका दायर करने पर प्रति प्रतिवादी 50 रूपये शुल्क जमा करवाया जाता है. बाकी खर्च वकील पर निर्भर करता है, जिसे वकील कितनी फीस लेता है, यदि आप मामले की पैरवी खुद कर रहे हैं तो वकील खर्चा बच जाता है. बाकी कोई अन्य खर्चा नहीं है.
याचिका स्वीकार हो जाएगी या नहीं...?
किसी मामले की जब याचिका डाली जा रही है और मेल बेहद गंभीर है और कई व्यक्तियों के जीवन से जुड़ा है और व्यापक स्तर पर समाज में बुरा असर पड़ रहा है तो जल्द ही स्वीकार की जा सकती है, और निर्णय भी बहुत जल्द आ सकता है.
जनहित याचिकाओं की अधिकता को देखते हुए सुनवाई में लंबा समय लग जाता है, फिर भी कुछ महत्वपूर्ण मामलों में जल्दी ही सुनवाई होती है और निर्णय भी फास्ट आता है.
कई बार जनहित याचिकाओं का दुरुपयोग भी होता है, ऐसे केमामलों में न्यायालय अपना समय खराब करने के लिए याचिका कर्ता पर आर्थिक दण्ड भी लगा सकता है...!
ये थी जानकारी जनहित याचिका के बारे में, आपको कैसी लगी... कमेंट करके बताइए...!

टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें
कोई भी समस्या हो तो हमें बताएं